पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰

मनुष्य जीवन में दुर्लभ हैं पांच सकार॰॰॰॰॰॰ जीवन में सुवास देता है विनयभाव॰॰॰॰॰॰ अनुभव में होता है जीवन का सार॰॰॰॰॰॰ आप स्वयं परिवार के लिये आदर्श स्थापित करें॰॰॰॰॰॰ संकल्प करने से असंभव भी संभव बन जाता है॰॰॰॰॰॰ धन का उपयोग दो क्षेत्रों करना श्रेयकर॰॰॰॰॰॰ परमात्मा बनने की ताकत केवल मनुष्य में॰॰॰॰॰॰

Monday, April 28, 2008

''पूज्य साध्वी संवेगनिधी श्रीजी म॰सा॰ थाणा आठ''
चतुर्मास,२२ जुलाई से २९ नवम्बर २००७ रायपुर (छ॰ग॰)
पूज्य साध्वी संवेगनिधी श्रीजी म॰ सा॰ ठाणा आठ ने अपनी शिष्याऔं ०१ - पू॰ सा॰ धैर्य निधी श्रीजी म॰ सा॰, ०२ - पू॰ सा॰ बोधिनिधी श्रीजी म॰ सा॰, ०३ - पू॰ सा॰ पर्वनिधी श्रीजी म॰ सा॰, ०४ - पू॰ सा॰ देशनानिधी श्रीजी म॰ सा॰, ०५ - पू॰ सा॰ ध्याननिधी श्रीजी म॰ सा॰, ०६ - पू॰ सा॰ श्रद्धानिधी श्रीजी म॰ सा॰, ०७ - पू॰ सा॰ सुकृतनिधी श्रीजी म॰ सा॰ के साथ शंकर नगर जैन श्री संघ, संदीप जैन भवन में २२ जुलाई से २९ नवम्बर २००७ तक अपनी अमृत-वाणी की वर्षा कर धर्मावलंबियों को लाभांवित किया । श्री विनायक सेवा समिति के सदस्यों ने जोर-शोर से उनके प्रवचनों को समिति के संरक्षकगण आदरणीय श्री अनूपचंद जैन जी एवं पूज्य माताजी श्रीमती गुणमाला जैन जी के आशीर्वाद से समिति के अध्यक्ष एवं संयोजक श्री अनिल जैन जी के कुशल मार्ग-दर्शन में समिति के सचिव श्री राजेश बिस्सा ने अपने साथी स्वयंसेवकों श्री संजय सिंह ठाकुर एवं श्री धनवेंद्र जायसवाल के साथ जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया

01- चातुर्मास की सार्थकता परिवर्तन में - पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰




02- चातुर्मास अर्थात पानी और वाणी का मौसमः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰




03- मनुष्य जीवन पुण्य से मिलता है, इसे बर्बाद नहीं करें - पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰




04- पश्चाताप के आंसू से पाप धूलते हैं - पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







05- द्वेश को विभाजन में, प्रेम को विस्तार में रुचि हैः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰




06- समृद्ध ही नहीं संस्कारी भी बनेः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰











07- अहंकार परमात्मा तक नहीं पहुंचने देताः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







08- जो गुरु की कठोरता में करुणा के दर्शन करे वह है विनयवानः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







Sunday, April 27, 2008

09- जीव के प्रति दया का भाव रखें - पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰











10- गंभीर होना चाहिये श्रावक कोः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







11- सरोवर की तरह होना चाहिये मनुष्य कोः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







12- मन को रिमोट व शरीर को रोबोट बनायें - पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰











13- लोगों के अभिप्राय को नहीं अंतःकरण को प्रधानता दीजियेः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







14- मनुष्य को वस्तुनिष्ठ नहीं गुणनिष्ठ बनना चाहियेः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰











15- प्रभु दीक्षा पाने के लिये श्रावक को पहले प्रेम, प्रमोद एवं पश्चाताप दीक्षा ग्रहण करना चहाहियेः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰







16- धर्म में बुद्धि नहीं ह्रदय की प्रधानता होः पूज्य साध्वी संवेगनिधि श्रीजी म॰ सा॰