
व्यक्ती, द्रव्य, क्षेत्र, काल, व भाव से गुस्से को सम्हालना चाहियेः पू॰सा॰ संवेगनिधि श्रीजी म॰सा॰
क्रोध को नियंत्रित करने के लिये पांच तत्वों का सहारा लेना चाहिये - व्यक्ती, द्रव्य, क्षेत्र, काल, व भाव से गुस्से को सम्हालना चाहिये। अपने से बड़े व्यक्ती, छोटे नुकसान पर, धार्मिक स्थान पर और शुभ प्रसंगो के समय गुस्सा नहीं करने का संकल्प लेना चाहिये।परिवार के बड़े सदस्यों को आम के वृक्ष के की तरह होना चाहिये जो छाया और फल दोनों देते हैं। नारियल का पेड़ फल देता है लेकिन छाया नहीं देता और बरगद के पेड़ से छाया तो मिलती है लेकिन फल नहीं मिलता। बुजुर्गों को अपने आश्रितों को साधन सुविधायें और प्यार दोनो देना चाहिये। परिवार - समाज मे समरसता बढ़ाना चाहिये। गुस्सा सरसता को निगल जाता है। इसलिये क्रोध का त्याग करना चाहिये। बोलना तो सबको आता है, लेकिन क्या और कैसे बोलना है यह बुजुर्गों को भी सीखते रहना चाहिये। यदि अच्छा बोलना न आये, तो मौन साध लेना चाहिये, इससे सरसता बनी रहेगी। प्रेम की रिक्तता धन संपत्ती से नहीं भरी जा सकती, लेकिन धन कि रिक्तता को प्रेम से भरा जा सकता है
क्रोध को नियंत्रित करने के लिये पांच तत्वों का सहारा लेना चाहिये - व्यक्ती, द्रव्य, क्षेत्र, काल, व भाव से गुस्से को सम्हालना चाहिये। अपने से बड़े व्यक्ती, छोटे नुकसान पर, धार्मिक स्थान पर और शुभ प्रसंगो के समय गुस्सा नहीं करने का संकल्प लेना चाहिये।परिवार के बड़े सदस्यों को आम के वृक्ष के की तरह होना चाहिये जो छाया और फल दोनों देते हैं। नारियल का पेड़ फल देता है लेकिन छाया नहीं देता और बरगद के पेड़ से छाया तो मिलती है लेकिन फल नहीं मिलता। बुजुर्गों को अपने आश्रितों को साधन सुविधायें और प्यार दोनो देना चाहिये। परिवार - समाज मे समरसता बढ़ाना चाहिये। गुस्सा सरसता को निगल जाता है। इसलिये क्रोध का त्याग करना चाहिये। बोलना तो सबको आता है, लेकिन क्या और कैसे बोलना है यह बुजुर्गों को भी सीखते रहना चाहिये। यदि अच्छा बोलना न आये, तो मौन साध लेना चाहिये, इससे सरसता बनी रहेगी। प्रेम की रिक्तता धन संपत्ती से नहीं भरी जा सकती, लेकिन धन कि रिक्तता को प्रेम से भरा जा सकता है
No comments:
Post a Comment